भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, कात्रे नगर के परिसर स्थित चिकित्सालय का नामकरण संत गुरु घासीदास चिकित्सालय किया गया है। जो न केवल सतनाम पंथ के प्रवर्तक थे, बल्कि सामाजिक समरसता के प्रबल हिमायती भी थे। चिकित्सालय का नाम गुरुबाबा के नाम पर करने बापट जी का विचार था कि “इस क्षेत्र में सतनाम पंथ के अनुयायियों की संख्या अत्यधिक है और छत्तीसगढ़ की धरा पर बाबा गुरु घासीदास जी के प्रति लोगों की श्रद्धा अकथनीय है। इसलिए बापट जी ने उनके नाम पर यह चिकित्सालय समर्पित किया है, ताकि ‘मनखे‑मनखे एक समान’ का उनका संदेश स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से भी फैल सके।” इस चिकित्सालय का उद्देश्य केवल रोगियों का उपचार करना नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य जागरूकता और समरसता का संचार करना भी है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह अस्पताल क्षेत्रवासियों के लिए एक वरदान साबित होगा। संलग्न चित्र में चिकित्सालय के शुभारम्भ के अवसर पर उपस्थित हैं - मागो वैद्य जी(संघ के अखिल भारतीय अधिकारी) पंढरी राव जी कृदत्त (तत्कालीन संघचालक,रायपुर विभाग) वैद्य गोदावरी शर्मा,चाम्पा (संस्थापक सदस्य,कात्रे नगर) एवं पद्म श्री दामोदर गणेश बापट जी
